“तेरे आने से खिल जाती है,
मुस्कराहट इन लबों पे
अनगिनत यादें दे जाती है,
दस्त मेरे दिल के दरवाजे पर
छुकर मेरे पहलू को फिर छेड जाती है,यादों को
अब क्या बताऊँ में अपने अरमानों को
अब क्या बाकी रहा बताने को
कुछ पल मैने ठहर कर देखा,अपनी परछाई को
मेरे साथ वो चलती है,निष्पक्ष होकर
कुछ कहती नहीं, कुछ सुनती, नही
फिर भी हरपल रहती है मेरा साया बनकर
फिर भी कहते हो व्यक्त करूं,अपने जज्बातों को
अब और क्या बाकी रहा बताने को… । ”
अर्चना होता
