अभी बाकि है ?
ज्यादा नहीं थोड़े की जरुरत है
बोहोत नहीं पर कुछ तो जरुरत है
अपनेपन की तलाश करते करते
काफ़ी दूर निकल आई हूं पर
सच तो यह है की जो ढ़ूढ़ने आई हूं
वो इस जहाँन मै ही कही खो गया है
रिश्तों मै वो रिश्ताना सा खो गया है
प्यार मै भी प्यार खो गया है
दोस्तों मै दोस्ताना खो गया है
जो साथ गुजारा समय थम सा गया है
हर पल ,हर दिन दौड़ते जा रहे है
घड़ी जिन्दंगी की दौड़ती जा रही है
और रोजाना जिंदगी जीने की होड़ मै
जिंदगी हम सबको खूब नचा रही है
सूबह से श्याम और शाम से रात का
सिलसिला रोज गुजर जाता है
ना गुजरे वक़्त को याद कर पाते
और ना ही जिंदगी को समझ पाते है
रोज नये सवालों से सामना कराती है
कभी कुछ सुलझा पाए है ,तो कभी
ना सुलझा पाने मै ही उलझ जाते है
काम होते है तो ,फिर नये सवाल घेर लेते है
चाहत और उलझनो को. समेटती
इस जिंदगी के कुछ सवाल है ,
जिनके जवाब की तलाश अभी बाकि है
आसान नहीं सब,अभी जवाब मिलना बाकी है।
~ डॉ स्वाति जाजू
प्राचार्य, बिलासपुर छत्तीसगढ़
