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रघुवर / मिठू डे
सबकुछ था पास मगर जाने क्यूं/ नितेश पालीवाल ‘नूर ‘
हे ! ज्ञान दायिनी हंस वाहिनी,वरद हस्त कर दे…/ सुश्री माधुरी करसाल ‘मधुरिमा’
सत्य समाज का/ चौधरी बिलाल
“मेरी कविता”मर्जी का मर्ज/ पल्लवी द्विवेदी
बदला आज समाज है, विकसित है संचार / हिम्मत चोरड़िया प्रज्ञा
यौवन से पूछो / देवेन्द्र चौबे
वतन के रखवाले / दीप्ति गुप्ता’दीप’
जिंदगी / डॉ. प्रभा जैन “श्री “
ज़िंदगी एक अजनबी किताब / कुसुम रानी सिंघल
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