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मेरी प्रिय मसूर दाल / संदीप कुमार विश्वास
मैं अब तंग आ गई आवारगी से / शिवानी ‘आरज़ू ‘
जब लड़कियां प्रेम में पड़ी तो / प्रीति मौर्या
कुछ सीखें आवाज़ नहीं करतीं / प्रज्ञान जैन
कुछ दर्द मिला, कुछ ज़ख्म मिले, /अर्चना श्रीवास्तव
खुशनसीब है वो घर/ रुचि ग्रोवर
राधेकृष्ण/ शिबू कुमारी
दूसरों के वास्ते जीवन बसर कर देखिए/ लव कुमार ‘प्रणय’
“आदित्यायन : पुण्य भारी पड़ रहा है” — शौर्य से उपजी संवेदना की सशक्त कृति
सीधी सच्ची मेरी माँ है/ लव कुमार प्रणय
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