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खामोशी की गूंज/
मां के बिना कोई अपना सा न दिखता है/ नीलिमा सिंघल
हिसाब लगाकर बैठे है / गौतम चमन
अभी बाकि है / डॉ स्वाति जाजू
रघुवर / मिठू डे
सबकुछ था पास मगर जाने क्यूं/ नितेश पालीवाल ‘नूर ‘
हे ! ज्ञान दायिनी हंस वाहिनी,वरद हस्त कर दे…/ सुश्री माधुरी करसाल ‘मधुरिमा’
सत्य समाज का/ चौधरी बिलाल
“मेरी कविता”मर्जी का मर्ज/ पल्लवी द्विवेदी
बदला आज समाज है, विकसित है संचार / हिम्मत चोरड़िया प्रज्ञा
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