खुशियों की सरगम/ रंजना बिनानी काव्या

खुशियों की सरगम ने, राग सुनाई है,
वीणा के तारों ने, झंकार बजाई है..।
द्वितीय वार्षिकोत्सव की, शुभ घड़ी देखो आई है
आज पुनः,राम जन्मोत्सव की बेला आई है।

ईश्वर की लीला ,देखो बड़ी निराली है,
स्वर्णिम युग की झांकी ,पड़ती दिखाई है।
कुदरत की महिमा ,देखो कितनी भारी है
स्वर्ग सी लागे आज, अवधपुरी रजधानी है..।

जहां कल कल बहती ,सरयू की पावन धारा है,
हर घाट की भव्यता का ,रूप निराला है..।
चहुंऔर राम लला की ,जय जयकार पड़ी सुनाई है,
जोर शोर से हो रही रामलला के,स्वागत की तैयारी है।

बरसों की तपस्या,अब रंग लाई है,
झूम झूम के नाचो गाओ,बहुत-बहुत बधाई है‌।
सनातन धर्म ने, विजय पताका फहराई है,
बड़े इंतजार के बाद ,ये अनमोल घड़ी आई है।

~ रंजना बिनानी काव्या
गोलाघाट असम

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