जब लड़कियां प्रेम में पड़ी तो
उनका अल्हड़पन बगावती हुआ
उनके अंदर हर चीज़ के लिए हिम्मत आया
वे अथक प्रयास और तमाम कोशिशें की
जिससे कि वो दोनों एक हो सकें
और जब लड़के प्रेम में पड़े
तो उनके ऊपर घर परिवार समाज की जिम्मेदारी आई
उनके में प्रेम नहीं, प्राथमिकता ही बदल गई
वो सब चीज उनका बोझ बनी
जिसके कोशिश मात्र से वे एक हो सकते थे
वो तो कभी आया ही नहीं जिसे सच में उम्र के साथ जरूरत हो
जिस साहस की आवश्यकता थी
सच में वो कभी नहीं आया।
~ प्रीति मौर्या
