जीना अभी सीख रहा हूँ
हालातों को मध्य नज़र रख
मैं जीना सीख रहा हूँ।
ख़ामोश हूँ,
खुद में संयम लाना सीख रहा हूँ।
रख देता था हर मुद्दे पर
राय अपनी,
अब मैं उन मुद्दों पर
मौन रहना सीख रहा हूँ।
साथ दिया है मैंने
जिसने भी बुलाया मुझे,
धीरे-धीरे अपनों में
ग़ैरों की पहचान करना सीख रहा हूँ।
सही होकर खुद को
सही साबित करने में
कितनी बार विफल हुआ हूँ?
अब मैं सही होकर भी
खुद को ग़लत साबित करना सीख रहा हूँ।
दुश्मनों से मोहब्बत करना
तो सीख लिया मैंने,
मोहब्बत से उनके साथ
रहना अभी सीख रहा हूँ।
नहीं आती मुझे
साहित्य की कोई वर्णमाला,
बदले हुए लोगों के चेहरों से
मैं जीवन की भाषा सीख रहा हूँ।
ख़ामोश हूँ,
खुद में संयम लाना सीख रहा हूँ।
~ रोहित मीना
