दूसरों के वास्ते जीवन बसर कर देखिए/ लव कुमार ‘प्रणय’

ग़ज़ल
दूसरों के वास्ते जीवन बसर कर देखिए
आप फूलों की तरह पग-पग बिखर कर देखिए

चाहते यदि ज़िन्दगी में ग़म न हों खुशियाँ मिलें
आप बस असहाय मन में ख़्वाब भर कर देखिए

ये भँवर भी रास्ता बन जाएगी सुखधाम का
आप अपनी बेबसी के पर कतर कर देखिए

देखते ही देखते कट जाएगी ये ज़िन्दगी
बस किसी के प्यार में इक बार मर कर देखिए

ज़ख्म पर मरहम लगाने आयेंगे वो दौड़कर
आप उनकी चाहतों में बन- सँवर कर देखिए

सब तुम्हारे ही नज़र आयेंगे दुनिया में तुम्हें
बस किसी की आँख से दिल में उतर कर देखिए

आज सुनता कौन है दुख- दर्द अपनों के ‘प्रणय’
मैं नहीं कहता ज़रा खुद ही ठहर कर देखिए

~ लव कुमार ‘प्रणय’

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