पीपल वाला मोड़
ज़िन्दगी जब शहर के शोरोगुल से आक्रांत होकर
घुटन और सड़ांध से छटपटाने लगती है
तो मन दौड़ पड़ता है
किसी गांव की एक पगडंडी पर।
लहलहाते हरे खेतों के बीच से गुजरते,
किसी अमराई छांव के सुरंग से निकलकर,
कहीं पीपल वाले मोड़ पर मुड़ते हुए,
जो ले जाती है,
मंदिर किनारे वाले तालाब के पास ,
जहां बैठकर मैने
सपने देखे थे
शहर आने के…
~ शुभम तिवारी
