राधेकृष्ण/ शिबू कुमारी

कान्हा – कान्हा  कहते कहते, मैं कान्हा की हो गई।
मैं तो बस उनके चरणों में ही बस गई।
बड़े नटखट, रास रचीले, मन भाते मेरे कृष्ण मुरारी,
जिनके प्रेम में सिमटी ये दुनिया सारी,
उनकी मुरली की धुन दूर करे पीड़ा सारी,
उनकी सूरत बड़ी प्यारी, मन को मेरे भाती।
कन्हैया मेरे बड़े लाडले सब के, राधा बिन वो अधूरे है।
राधे कृष्ण राधे कृष्ण जपते जपते सब चाहत पूरे है।

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