स्नेह से भरी आवाज़
सुबह का समय आगे बढ़ते ही
फ़ोन खोलने से पहले ही
दिल को पता होता है —
वह संदेश आ चुका होगा।
“सब ठीक हैं न,
सबने चाय पी ली?”
यह सिर्फ़ एक सवाल नहीं,
हर दिन, ठीक उसी समय
सबको पूछने वाली
एक माँ जैसी मोहब्बत है।
आवाज़ चली गई है कहते हुए भी,
काम के बीच से समय निकालकर भेजा हुआ,
फिर भी समय को
कभी धोखा न देकर
हमेशा पहुँचने वाला यह स्नेह।
“ठीक है, फिर मिलते हैं”
ये शब्द
विदाई नहीं हैं,
फिर लौट आने का भरोसा हैं।
अपना दुःख भी
आने नहीं देते हुए,
वक़्त निकालकर
दूसरों की ख़बर
रोज़ पूछने वाला जो है —
वही हमारा सोना है,
हमारा गर्व।
सनल कक्काड
