हिन्दी भावों की गहराई/ कार्तिकेय कुमार त्रिपाठी ‘राम’

हिन्दी भावों की गहराई
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हिन्दी तन-मन -सी कोमल है,
है भाव शब्द की गहराई,
एक-एक शब्द शहद-सा मीठा,
ज्यों हो गांवों की अमराई।
हिन्दी तन-मन ..
शब्द, छंद और संवादों से,
मन की वेदना बतलाती,
दूसरी भाषा तो बस भाषा हैं,
हिन्दी प्रेम की भाषा सिखलाती।
हिन्दी तन-मन …
धर्म-कर्म की इस भूमि पर,
सम्मान मिला कितना हिन्दी को,
राजनीति की बली चढ़ी है,
ये बतलाती हिन्दू को।
हिन्दी तन-मन …
सतयुग,त्रेता और द्वापर में,
भाषा से सम्मान झलकता था,
ये कलयुग तो कलुषित होकर,
हिन्दी पर मंडराता है।
हिन्दी तन-मन ..
भोले से हम करें कामना,
हिन्दी को मां -सा सम्मान मिले,
हिन्दी तो हर जन-मन की भाषा,
बड़े शीर्ष अभिमान मिले।
हिन्दी तन-मन ..

कार्तिकेय कुमार त्रिपाठी ‘राम’

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