हे नारी तुम कलयुग में भी धर्म पग पर चलती जाओ/भाग्यश्री

हे नारी तुम कलयुग में भी धर्म पग पर चलती जाओ,
कर्मो से अपने इस जग को, तुम दिव्य स्वरूप दिखाओ l
तुम झुको सही,पर रुको नही, यह अद्भुत दृश्य दिखाओ,
मर्यादा में रहकर भी तुम नित विजय ध्वज लहराओ l
संस्कारों से कुल को अपने तुम प्रेम पूर्ण कर जाओ,
सभी भूमिकाओ में तुम अपनी गरिमा को सफल बनाओ l
कर्तव्य निभाकर तुम अपना निस्वार्थ चरित दिखलाओ,
सेवा कर वृद्धजनो की तुम मातृत्व छवि दिखलाओ l
कोमल से हृदय पर तुम अपने पहरा इस तरह लगाओ,
जो घात करे उसे कर दो क्षमा तुम सीख नई सिखलाओ l
अपने पावन मन से तुम उस अंत: करण से जुड़ जाओ,
जो संचालक है इस जग का, उसे अपना न्याय बनाओ l
सपनो को कर मुक्त बेड़ियों से, बन विहग प्लवन कर जाओ,
अपनो का सहारा बन कर तुम एक नया इतिहास रचाओ l
तुम बनकर सीता आत्म सम्मान के दीप प्रदीप्त जलाओ,
निसंदेह बनो राधा पर मन में कृष्ण भक्ति को जगाओ l
ईश्वर से निश्छल कोई नही, माँ बाप से कर्मठ कोई नही,
करो जीवन समर्पित तुम अपना, सत्कार में मन तर जाओ l
हे नारी तुम कलयुग में भी धर्म पग पर चलती जाओ,
कर्मो से अपने इस जग को, तुम दिव्य स्वरूप दिखाओ l

~ भाग्यश्री

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