
“आदित्यायन : पुण्य भारी पड़ रहा है” — शौर्य से उपजी संवेदना की सशक्त कृति
“आदित्यायन : पुण्य भारी पड़ रहा है” का शब्द कलश प्रकाशन के माध्यम से प्रकाशित होना हमारे लिए अत्यंत गर्व और सम्मान का विषय है। इस कृति के लेखक विद्यावाचस्पति डॉ० कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ भारतीय सेना में कर्नल के पद पर कार्यरत थे—एक ऐसा व्यक्तित्व जो रणभूमि में राष्ट्र की रक्षा करता रहा और साहित्य में जीवन-मूल्यों की रक्षा करता रहा।
इस पुस्तक की रचनाओं में शब्द एक अनुशासित सैनिक की भाँति कदमताल करते प्रतीत होते हैं। यह अत्यंत आश्चर्यजनक और प्रेरक अनुभव है कि जो व्यक्ति युद्धभूमि में प्राण देने का संकल्प रखता रहा, वही जब कलम थामता है तो जीवन, पुण्य, धर्म और मानवीय संवेदनाओं की बात करता है। जिसकी जिह्वा सदैव पौरुष और शौर्य का उद्घोष रही, वही कलम के माध्यम से करुणा, संवेदना और आत्मचिंतन को स्वर देती है।
“आदित्यायन : पुण्य भारी पड़ रहा है” केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि शौर्य और संवेदना के अद्वितीय समन्वय का जीवंत दस्तावेज़ है। हमें विश्वास है कि यह कृति पाठकों के हृदय को गहराई से स्पर्श करेगी और समकालीन साहित्य में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगी।
— अनुज पाठक
संस्थापक
शब्द कलश प्रकाशन
संपर्क सूत्र : 7693086736
