सबसे लाड़ करती हैं, सबकी लाड़ली बन जाती हैं,
पायल की छम-छम से घर की रौनक बढ़ाती हैं।
अपनी मीठी बोली से सबके मन को हर्षाती हैं,
खुशनसीब है वो घर, जहाँ बेटियाँ आती हैं।।
खेल खिलौनों से अपने सभी सपने सजाती हैं,
समझदारी की बातें कर हमको चौकाती हैं।
देखते ही देखते फिर बेटियाँ बड़ी हो जाती हैं,
खुशनसीब है वो घर, जहाँ बेटियाँ आती हैं ।।
अनसुलझी पहेलियों को खूब अच्छे से सुलझाती हैं,
किसी का दुख-दर्द देख नहीं पाती हैं।
अपने स्नेह की खुशबू से पूरे घर को महकाती हैं,
खुशनसीब है वो घर, जहाँ बेटियाँ आती हैं ।।
हर रिश्ते पर अनुराग लुटाती हैं,
रिश्तों का एक प्यारा गुलिस्ताँ बनाती हैं।
घर-आंगन में खुशियों की फुलवारी लगाती हैं,
खुशनसीब है वो घर, जहाँ बेटियाँ आती हैं ।।
सभी तमन्नाओं में रंग भर जाती हैं,
आसमान को ज़मीन पर झुकाती हैं।
मात-पिता को नाज़ करवाती हैं,
खुशनसीब है वो घर, जहाँ बेटियाँ आती हैं।।
अपनी संस्कृति, घर की मान-मर्यादा निभाती हैं,
कमजोरी नहीं, ये उनकी शक्ति दर्शाती हैं ।
दो-दो कुलों और परिवारों की शोभा बढ़ाती हैं,
खुशनसीब है वो घर, जहाँ बेटियाँ आती हैं।।
रुचि ग्रोवर
शहाजहाँपुर उत्तर प्रदेश
