ग़ज़ल
मैं अब तंग आ गई आवारगी से
करों मत बातें अब बेचारगी से
रहो नाराज़ जब तक रह सको तुम
नहीं डरती मैं इस नाराज़गी से
बड़ा नुक़सान मेरा हो रहा है
क़सम से यार अब इस शायरी से
गंवाया तुमने सब आवारगी में
कभी कुछ सीख लेते ज़िंदगी से
अंधेरो से तो वाक़िफ़ हूँ मैं यारों
चलो अब बात कर ले रौशनी से
~शिवानी”आरज़ू”
