शांत चेहरे के पीछे का तूफान/ सौ,भावना मोहन विधानी

शांत चेहरे के पीछे अक्सर एक तूफान होता है,
जो हमेशा मुस्कुराता है उसके अंदर दर्द गहरा होता है।
होंठ जब ओढ़ लेते हैं गहरी खामोशी की चादर,
आंखों से दिखता है फिर दर्द का सारा मंजर।

दिल में जब जब भी दर्द का सैलाब उठता है,
आंखों से फिर आंसुओं का दरिया बहता है।
भीड़ से नजरें चुरा कर तनहाई में खो जाता है मन,
खुशियां गुम हो जाती है पतझड़ सा हो जाता है जीवन।

रिश्ते सारे फिर सिर्फ नाम मात्र के रह जाते हैं,
शांत चेहरे के पीछे के तूफान हिम्मत तोड़ जाते हैं।
लाखों की भीड़ में भी दिल खुद को अकेला ही पाता है,
बरसते हैं नैन सावन से फिर भी दिल प्यासा रह जाता है।

~ सौ, भावना मोहन विधानी
अमरावती महाराष्ट्र।

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