दिल मे रहिए या फिर दुआओ मे रहिए / बोधिसत्व कस्तूरिया एडवौकेट

दिल मे रहिए या फिर दुआओ मे रहिए!
चुभ जाए बात कोई फिर भी चुप रहिए!!
है जिन्दगी का बस केवल यही फलॅसफा!
यारो के तंज,हँसने-हँसाने के लिए सहिए!!
घर मे सुख शान्ति रखनी हो जो बरकरार!
दो चार बात सहधर्मिणी की सहते रहिए!!
जिन्दगी का ये सफर बडा मुश्किल जनाब!
रूठने वालो को भी कभी 2 मनाते रहिए!!
कही जो बाते आपसे तजुर्बाए जिन्दगी है!
माने न माने मर्जी आपकी,औरो से कहिए!!

बोधिसत्व कस्तूरिया एडवौकेट,कवि,पत्रकार

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