तुम से मोहब्बत करता था/ अच्युत उमर्जी

तुम से मोहब्बत करता था…
जानती तो थी तुम…
तुम जानती हो यह मैं भी जानता था…
मेरे इजहार करने में देरी क्या हुई…
घरवालों ने तेरी शादी ही कर दी…
और…
हम ने खड़े खड़े बारात को जाते हुए देखा…
देखते देखते एक साल हो गया…
और…
खुशी की खबर नहीं आयी…
बल्कि…
डिवोर्स की खबर आयी…
और…
हम कोसते रह गए अपने आपको…
काश! मेरी इजहार की देरी की वजह के कारण…
तुम्हें यह दिन देखना नसीब में आया…
यकीन करो मेरा…
दिल से साॅरी…!

अच्युत उमर्जी
पुणे महाराष्ट्र

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