बचपन में लगता था बड़ा हो जाऊँ
बड़े होके लगता है फिर से बच्चा बन जाऊँ,
अब समझ में आने लगा है धीरे-धीरे
जहाँ हूँ पहले वहाँ पूरा जी लूँ |
बचपन में लगता था सब अपने हैं
बड़े होके जाना सब अपने मतलब के हैं,
कितना किये है दुसरो के लिए ये कोई मानता नहीं
क्योंकि हमारे पास जताने के लिए अल्फाज़ नहीं है |
~ मानसी अग्रवाल
