मैं सत्यम्, शिवम्, सुन्दरम् हूँ
मैं सत्यम्, शिवम्, सुन्दरम् हूँ।
मैं उजाला हूँ और मैं ही तम हूँ।
सृष्टि में जीव जो भी है आया
उसका मैं ही मरण और जनम हूँ।
मुझको जिसने है जाना पहचाना।
ह़ो गया वो ही मेरा दीवाना।
जो न मुझको समझ पाया अबतक
उसको समझा न अबतक जमाना।
मैं खुशी और मैं ही तो ग़म हूँ।
मैं सत्यम्, शिवम्, सुन्दरम् हूँ।।
मेरा है न कोई निर्माता।
मैं नज़र न किसी को हूँ आता।
मेरी अपनी है दुनिया निराली
सारी दुनिया को मैं हूँ चलाता।
सृष्टि मैं, दृष्टि मैं,आतम् हूँ।
मैं सत्यम्, शिवम्, सुन्दरम् हूँ।।
पृथ्वी,जल,वायु,अग्नि और नभ में।
फूल में मैं ही और मैं सौरभ में।
देह में हूँ विराजित सभी की-
दीप में भी और मैं शलभ में।
मै वहम् हूँ, मैं ही अहम् हूँ।
मैं सत्यम्, शिवम्, सुन्दरम् हूँ।।
~ शशि तिवारी गोंदिया (महाराष्ट्र)
