मेरी व्यथाएँ / राज जाजमे

कविता शीर्षक -मेरी व्यथाएँ

मन में व्यथाएँ हैं।
जीवन में विपदाएँ हैं।
कहनी मुझे कथाएँ हैं।
कौन सुने? किससे कहूँ?
हर व्यक्ति की समस्याएँ हैं।

सबके निकट हूँ मैं।
दूसरों को मैं समझता हूँ।
अपने मन की बात पर मैं
न किसी को बता पाता।

कोई तो होगा इस दुनिया में,
जो मुझे समझे और समझाए।
जीवन की एक नई राह बताए।

दृढ़ निश्चय कर बढ़े चलो-
ऐसा एक संकल्प कराए।

~ राज जाजमे

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