निराला जी ने जन्म लिया था राम सहाय जी के घर में।
पुलकित देश अपार हुआ था खुशियां छाई अंबर में।।
१/
आर्थिक कठिनाइयों का खुद किया सामना आपने,
समन्वय और मतवाला पत्रिका का संपादन किया आपने।
आपकी शिक्षा आपकी दीक्षा ना भूले जीवन भरमें,
पुलकित देश—————।।
२/
सामाजिक अन्याय के विरुद्ध लेखन किया निराला ने,
कवि लेखक संगीत रूप में क्रांति भी लाई निराला ने।
आपके प्रति श्रद्धा अर्पित है हिंद दिलों के स्वर स्वर में,
पुलकित देश—————–।।
३/
मूल नाम सूर्यकांत त्रिपाठी उपनाम निराला आपका,
सरकार द्वारा डाक टिकट जारी हुआ था आपका।
सजल नेत्र लेकर हम ढूंढे आज तुम्हें भारत भर में,
पुलकितदेश————–।।
४/
पद्म भूषण साहित्य अकादमी पुरस्कार पाया आपने,
महाप्राण की मिली उपाधि साहित्य न छोड़ा आपने।
हो रही जय जयकार आज हिंदुस्तान के जर जर में,
पुलकित देश————।।
५/
निराला जी के तन में रही थी सदा ही सच्ची आत्मा,
सूर्यकांत त्रिपाठी कहां बता दो परमेश्वर परमात्मा।
नाम देश में ही नहीं बल्कि फैला धरती अंबर में,
पुलकितदेश—————-।।
६/
जब तक नील गगन का चंदा अपनी छटा दिखाएगा,
तब तक सूर्यकांत की गाथा विश्व झूम कर गाएगा।
आपका नाम का अलख जगा है मंजुल हर एक घर घर में,
पुलकितदेश—————।।
मनोज मंजुल
ओज कवि कासगंज जनपद कासगंज उत्तर प्रदेश
