यतीन मस्ताना/ सुभाष कुशवाहा

यतीन मस्ताना

जब था कभी गुमसुम जमाना,
तेरे मुस्कराने का अहसास हुआ।
नहीं जाने क्यों उस दिन मुझे,
तुझसे बिछड़ने का आभास हुआ।।

आज तेरी तस्वीर और यादें भी,
मुझसे बहुत कुछ है कहता।
मेरा दिल नहीं जाने क्यों आज,
बेझिझक है मिलना चाहता।।

वो लम्हें वो पल बीते आज भी,
हर क्षण हर पल याद है आता।
तेरे बिना नहीं मुझे आज भी,
ऐसो आराम बिल्कुल भाता।।

तेरे शिवा न मेरे दिल की पीड़ा,
इस जहाँ में समझ कोई पाता।
ममतामयी सागर मुझे घुमाने,
कहाँ कोई मुझको ले जाता।।

अबतक तुझे खोकर भी मैं,
न जाने किस लिए जिन्दा हूँ।
दुनियां वालों के भी नजर में,
मैं यतीन मस्ताना परिंदा हूँ।।

~सुभाष कुशवाहा

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