
“ढूँढता रहा”
लेखक — आदरणीय अनिल सिंह ‘बच्चू’ जी
हमें यह घोषणा करते हुए अत्यंत हर्ष एवं गौरव की अनुभूति हो रही है कि आदरणीय अनिल सिंह ‘बच्चू’ जी की साहित्यिक कृति “ढूँढता रहा” का प्रकाशन शब्द कलश प्रकाशन से हुआ है।
“ढूँढता रहा” केवल एक पुस्तक का नाम नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर चलने वाली उस निरंतर खोज का भाव है, जिसमें वह जीवन, संबंधों, संवेदनाओं और स्वयं के अस्तित्व के अर्थ को तलाशता रहता है। लेखक ने अपनी अनुभूतियों और विचारों को सहज, संवेदनशील एवं प्रभावपूर्ण शब्दों में अभिव्यक्त करते हुए इस कृति को पाठकों के सम्मुख प्रस्तुत किया है।
पुस्तक के पृष्ठों में जीवन के अनुभवों की आहट, भावनाओं की गहराई और मानवीय संवेदनाओं की सहज अभिव्यक्ति दिखाई देती है। “ढूँढता रहा” पाठक को केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि ठहरकर सोचने, महसूस करने और अपने भीतर झाँकने के लिए भी आमंत्रित करती है।
शब्द कलश प्रकाशन के लिए यह हर्ष का विषय है कि हमें इस महत्वपूर्ण साहित्यिक कृति को पाठकों तक पहुँचाने का अवसर प्राप्त हुआ। हम आदरणीय अनिल सिंह ‘बच्चू’ जी को उनकी इस साहित्यिक उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित करते हैं और कामना करते हैं कि उनकी लेखनी निरंतर इसी प्रकार साहित्य-सृजन के पथ पर अग्रसर होती रहे।
पुस्तक उपलब्ध है
“ढूँढता रहा” — अनिल सिंह ‘बच्चू’
प्रकाशक : शब्द कलश प्रकाशन
शब्दों से संवेदना तक, साहित्य से समाज तक।
— शब्द कलश प्रकाशन
